रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती? जानिए इसका असली कारण

रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती? जानिए इसका असली कारण

क्या आपने कभी सोचा है कि रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती? अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं, तो आपने जरूर देखा होगा कि रेलवे ट्रैक खुले वातावरण में सालों तक पड़े रहते हैं। धूप, बारिश और नमी का असर झेलने के बावजूद इन पर सामान्य लोहे की तरह ज्यादा जंग दिखाई नहीं देती। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि आखिर इसका कारण क्या है।

आमतौर पर लोहे से बनी किसी भी चीज पर यदि पेंट न किया जाए और वह लंबे समय तक हवा और नमी के संपर्क में रहे, तो उस पर जंग लगने लगती है। लेकिन रेलवे ट्रैक पर कोई पेंट भी नहीं किया जाता, फिर भी वे वर्षों तक मजबूत बने रहते हैं। आइए इसकी असली वजह जानते हैं।

रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती?

असल में यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि रेल की पटरी पर बिल्कुल जंग नहीं लगती। सच्चाई यह है कि रेल की पटरियों पर जंग लगती है, लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम होती है और यह सामान्य लोहे की तुलना में काफी धीमी गति से फैलती है।

रेलवे ट्रैक बनाने के लिए साधारण लोहे की बजाय उच्च गुणवत्ता वाले हाई-कार्बन स्टील (High Carbon Steel) और विशेष मिश्रधातुओं का उपयोग किया जाता है। इनमें कार्बन के साथ मैंगनीज (Manganese), सिलिकॉन (Silicon) और अन्य तत्व मिलाए जाते हैं, जिससे स्टील अधिक मजबूत, टिकाऊ और घिसाव व जंग के प्रति अधिक प्रतिरोधी बन जाता है।

ट्रेनों के चलने से भी पड़ता है असर

रेल की पटरी का ऊपरी हिस्सा वह भाग होता है जिस पर ट्रेन के पहिए लगातार चलते हैं। पहियों के लगातार घर्षण के कारण इस हिस्से पर बनने वाली हल्की जंग अपने आप साफ होती रहती है। इसलिए ऊपर से देखने पर पटरी चमकदार दिखाई देती है।

हालांकि यदि आप पटरी के किनारों या उन रेलवे ट्रैकों को देखें जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो वहां हल्की भूरी जंग आसानी से दिखाई दे सकती है। इससे यह साबित होता है कि जंग पूरी तरह नहीं रुकती, बल्कि उसकी गति काफी कम होती है।

अगर पटरी साधारण लोहे की होती तो क्या होता?

कल्पना कीजिए कि रेलवे ट्रैक साधारण लोहे से बनाए जाते। चूंकि ट्रैक हमेशा बारिश, धूप और नमी के संपर्क में रहते हैं, इसलिए उन पर बहुत तेजी से जंग लगती। इससे उनकी मजबूती कम हो जाती और उन्हें बार-बार बदलना पड़ता।

ऐसी स्थिति में रेलवे का रखरखाव काफी महंगा हो जाता और यात्रियों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता था। इसी वजह से रेलवे ट्रैक बनाने में विशेष प्रकार के स्टील का इस्तेमाल किया जाता है।

रेलवे ट्रैक पर पेंट क्यों नहीं किया जाता?

कई लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि जब लोहे पर जंग रोकने के लिए पेंट किया जाता है, तो रेलवे ट्रैक पर पेंट क्यों नहीं किया जाता।

दरअसल ट्रैक के ऊपर ट्रेन के पहिए लगातार चलते रहते हैं। यदि इस हिस्से पर पेंट किया जाए तो वह कुछ ही समय में घिस जाएगा। इसलिए पेंट करने की बजाय ऐसी धातु का उपयोग किया जाता है जो लंबे समय तक मजबूत रहे और कम से कम जंग लगे।

क्या पुरानी रेल की पटरियां आज भी उपयोग में हैं?

भारत में रेलवे की शुरुआत अंग्रेजों के समय हुई थी। हालांकि उस दौर की सभी पटरियां आज भी उपयोग में नहीं हैं। रेलवे समय-समय पर पुरानी और घिसी हुई पटरियों को बदलता रहता है। फिर भी कई पुराने रेलवे मार्गों पर लंबे समय तक इस्तेमाल की गई मजबूत स्टील की पटरियां वर्षों तक सेवा देती रही हैं। नियमित निरीक्षण और रखरखाव की वजह से रेलवे ट्रैक सुरक्षित बने रहते हैं।

निष्कर्ष

अब आप समझ गए होंगे कि रेल की पटरी पर जंग क्यों नहीं लगती। वास्तव में पटरियों पर जंग पूरी तरह नहीं रुकती, बल्कि विशेष प्रकार के स्टील और मिश्रधातुओं के कारण इसकी गति काफी धीमी हो जाती है। साथ ही ट्रेन के पहियों का लगातार घर्षण ऊपरी सतह को साफ रखता है, इसलिए ट्रैक सामान्य लोहे की तरह जंग लगे हुए दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि रेलवे ट्रैक बिना पेंट के भी वर्षों तक सुरक्षित और मजबूत बने रहते हैं।

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